संत निरंकारी मिशन: “इंसानियत से जुड़ें, अहंकार से दूर रहें” – निरंकारी सतगुरु सुदीक्षा जी महाराज

सतगुरु सुदीक्षा जी ने कहा, "कोई भी ऐसा भाव मन में न लाएं जो इंसानियत से दूर करे।" उन्होंने समझाया कि यह शरीर, मन, और धन परमात्मा की देन हैं, इसलिए इनमें अहंकार का स्थान नहीं होना चाहिए।

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नाभा/चंडीगढ़, राजन गिल: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी ने पंजाब की मानव कल्याण यात्रा के अंतिम पड़ाव पर नाभा में विशाल संगत को संबोधित किया। सतगुरु सुदीक्षा जी ने कहा, “कोई भी ऐसा भाव मन में न लाएं जो इंसानियत से दूर करे।” उन्होंने समझाया कि यह शरीर, मन, और धन परमात्मा की देन हैं, इसलिए इनमें अहंकार का स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने मानवता की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को निम्रता और करुणा के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। सतगुरु जी ने बताया कि परमात्मा निराकार होते हुए भी हर कण में विद्यमान है, और इसे 24 घंटे अनुभव किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने कार्यों में मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। “इंसान का शरीर मिला है, इसलिए हमें असल में इंसान भी बनना है,” उन्होंने फरमाया। सतगुरु जी ने यह संदेश दिया कि हर किसी के साथ प्यार और करुणा का व्यवहार करना चाहिए।

आभार व्यक्त किया गया
पटियाला जोन के जोनल इंचार्ज राधे श्याम और नाभा ब्रांच के संयोजक बलवंत सिंह जी ने सतगुरु माता और राजपिता का स्वागत किया। इस मौके पर सिविल प्रशासन, पुलिस प्रशासन, अनाज मंडी के आढ़ती संघ और अन्य विभागों के सहयोग के लिए धन्यवाद व्यक्त किया गया।

साध संगत, संयोजकों, और सेवादल के सदस्यों का भी आभार प्रकट किया गया, जिन्होंने इस समागम को सफल बनाने में योगदान दिया।

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